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अक्टूबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दया का फल

                  एक गांव में नदी के पास कुछ लोग एकत्र होकर साप को मार रहे थे। तबी वहा से पंडित जा रहे थे। पंडित  भी एकत्र हुए लोग को देख ने पहोच गए।        पंडित  ने कहा : क्यों इस प्राणी को मार रहे हो। पिछले कर्म के कारण वह साप बना है। मंदिर में लोग इस कि पूजा करते है। इसमें भी प्राण बसे हुए है। तबी भीड़ में से युवक बोला..... फिर यह काटता क्यों है।          युवक की बात सुन कर पंडित ने कहा..... तुम लोग साप को बेवजह मरोगे तो साप कटेगा ही ना ! जब साप पर पाव गिरता है तब ही  साप काटता है। आप से भी ज्यादा डरपोक साप है जो थोड़ी सी आहट होते ही भाग जाता है। गांव के लोग पंडित को बहोत ही आदरभाव करते है। पंडित जी की बात सुन कर गांव के लोगो ने साप को छोड़ दिया।                 कुछ दिनों बाद पंडित जी शाम के समय नदी के किनारे जा रहे थे तब रास्ते मे साप बैठा हुआ था। पंडित जी ने साप को भगाने की बहोत कोशिश की पर साप भागा नही। पंडित जी ने खुद ही नदी के दूसरी तरफ च...

Blogar और आम एक समान!

              नमस्ते दोस्ती आज में आप से सफलता की बात करूंगा जिसे पाने के लिए हर व्यक्ति, हर पल परेशान रहता है। जिहा में आज सफलता की सीढी चढ़ने वाले ब्लॉगर की बात करूंगा।         ब्लॉग लिखना मेने शरू किया, लिखते लिखते 60 से ज्यादा पोस्ट मेने लिख भी दिए और अच्छा रिस्पॉश भी मिल रहा था। यह देख ते हुए मेने एडसन में अपना एकाउंट भी बना लिया। थोड़ा समय जाने के बाद मेरा एडसन अकाउंट के लिए अप्लाई किया हुआ एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिया गया कि अभी आपको हम एडसन में ad दिखाने का मौका नही दे सकते। फिर से अप्लाय करना। तुमारा ब्लॉग अभी एडसन के लिए तैयार नही हुआ है।             यह निष्फलता ने मुजे फिर कभी भी ब्लॉग नही लिखूंगा, ना ही पढूंगा मेने बंध कर दिया। 24 घन्टे बाद मुजे बचपन की कहानी याद आई जो बचपन मे स्कूल के समय मे आती थी।               "धीरज के फल मीठे"                           "सब्र का फ़ल मीठा"   ...

टीचर और बिछू

                 एक स्कूल के टीचर अपने बच्चों के साथ पास में नदी के किनारे  गए। टीचर ओर कुछ बच्चे पानी मे खेले, नाव बनाई, पत्थर फेंके ओर कुछ तो स्नान भी कर लिया।              टीचर ने देखा कि एक बिछू पत्थर के नीचे दबा हुआ था। तब टीचर ने उसे लकड़ी के सहारे बहार निकाल ने की कोशिश की पर बिछू बार बार लकड़ी को अपनी पूछ से डंख मरता था। जब भी टीचर बाहर निकल ने की कोशिश करे फिर से वह अपनी पूछ से डंख मरता। फिर भी टीचर ने पत्थर के नीचे से निकाल कर नदी में छोड़ दिया।          यह सब देख बच्चों ने टीचर से पूछा कि टीचर वह बार बार अपनी पूछ से डंख मरता था पर आप ने उसे क्यों बचाया।        टीचर ने बहोत सुंदर जवाब दिए कि वह बिछू है, उसका कर्म है कि वह डंख मारे वह अपना कर्म नही छोड़ा फिर हम भी मनुष्य है तो हम क्यों अपना कर्म छोड़े।

स्वामी जी और बंदर

                स्वामी विवेकानंद के बचपन की यह कहानी है, जब स्वामी जी मंदिर से वापसी के समय अपने घर के लिए प्रसाद लिया। रास्ते मे स्वामी जी को देख कुछ बंदर स्वामी जी के पास आने लगे जिसे देख स्वामी जी डर के मारे वापस मन्दिर की तरफ भागने लगे....                   फिर स्वामी जी अपने घर जाने के लिए रास्ते पर जाते कुछ बंदर फिर से स्वामी जी के आगे आकर डराने लगे, जिससे स्वामी जी फिर से डर कर मंदिर की तरफ आ जाते,                                         यह पास में बैठ कर एक साधु देख रहा था।साधु ने स्वामी जी को अपने पास बुलाया और कहा तुम जितना डरोगे सब तुम्हे डराएंगे, तुम खड़ेरहो,  देखो, सामने वाला क्या कर सकता है।                    साधु की बात सुन ने के बाद स्वामी जी रास्ते पर जाने लगे बंदर भी आगे की तरफ आने लगे पर स्वामी जी डरे नही जिससे बंदर वापस भाग गए...

बहेरा बना विजेता

            संतरामपुर गांव में हर साल दिवाली के त्यौहार ओर गांव के लोग मिल कर कुछ कुछ नया करने का सोचते है। जो भी विजेता होता उसे नए कपड़े, ईनाम में रुपये, फटाके, जो भी गांव के लोगो से बन पाये वह ईनाम के रूप में देते है।             दि वाली के त्यौहार पर भी कुछ नया ही होने वाला था। इस बार 20 से 25 फुट एक खम्बे पर चढ़ना था। खम्बे को गांव के तालाब के बीच मे गढ़ा कर के गाढ़ा गया। गांव के सारे लड़को ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया ।                खम्बे पर चढ़ना मुश्किल ही नही बहोत कठिन था। क्योंकि खम्बे पर कीचड़, पानी के बीच मे था। सबसे पहले खम्बे तक जाने के लिए उसे कीचड़ में जाकर ही खम्बे के पास जाना पड़ता था।              यह खेल देखने के लिए गांव और आसपास के पूरे गांव के लोग आते थे। और खुसी खुसी खेल को देखते है। आज पर कुछ नया देख ने को मिलेगा। घिरे घिरे गांव के सब लड़के खेल में भाग लेने लगे। सारे लड़को ने भाग लिया और गिरते, पड़ते खम्बे पर चढ़ते, गिरते थे। फिसलन के...

एक आइसक्रीम

            आज की प्रेरक कहानी एक बचे की है।           एक बच्चा होटल में जाकर चेयर पर बैठ जाता है।               वेटर बच्चे से पूछा .... क्या लोगे आप?                                   बच्चा ......  आइसक्रीम है!                                                    वेटर ... कोनसी आइसक्रीम लोगे?                                        बच्चा .... आप के पास कोनसी आइसक्रीम है?                        वेटर .... वेनिला आइसक्रीम, चोको आइसक्रीम, पिस्ता-बादाम आइसक्रीम, स्टोबेरी आइसक्रीम      ...

मनबुद्धि बना वैज्ञानिक

               एक गांव में एक लड़का रहता था। जो दिमाग से मनबुद्धि था। वह लड़के को कितना भी आप समझा दो, लिखवा दो पर उसे कुछ भी याद नही रहता था।           लड़के को सरारत करना अच्छा लगता था। वह पढ़ाई में मन बुद्धि होने से वह सरारत जो दूसरों की जान भी ले सकता है। पढ़ाई में चिड़या हवा में क्या भोजन कर के उड़ती है। फिर क्या उस ने अपने आसपास के सारे कीड़े, मकोड़े, पीस कर अपने ही दोस्त को पिला दिया क्योंकि वह भी हवा में उड़ सके । वह हवा में तो नही बल्कि बीमार हो गया जब सबको पता चला कि मनबुद्धि ने सारे कीड़े पिला दिए।                यह बात उसके स्कूल तक बात गई और मनबुद्धि  को एक लेटर बना के दे दिया जो अपनी माँ को देने के लिए कहा गया। मनबुद्धि लेटर अपनी माँ को दे दिया उसकी माँ ने लेटर पढ़ा और बोला......मनबुद्धि तू बहोत होशियार है, तेरे लायक कोई भी स्कूल नही बना! और मनबुद्धि अपने गले से लगा लिया।                धीरे धीरे वह अपने ही ...

दो मेंढक

                  एक गांव में पास तालाब हुआ करता था। तालाब में दो मेंढक जिसमे एक का नाम सोनू और दूसरे का नाम मोनू था। दोनों मेंढक बहोत अच्छे दोस्त थे।                 तालाब हमेशा पानी से हरा-भरा रहता था। लेकिन बीते कुछ बर्षो में बारिश ठीक से नही हुआ है। जिससे तालाब का पानी धीरे धीरे सुख ने लगा लगा।                  तालाब सुख गया पर एक गढ़े में पानी भरा हुआ था। सोनू वह गढ़े से बाहर आने के लिए,   बार बार छलांग लगा रहा था पर बार-बार सोनू फिसल कर गढ़े में गिर जाता था । यह देख......... मोनू ने कहा ...... .क्यों मेहनत कर रहे हो? कुछ दिन में बारिश होने वाली है। बारिश होते ही हम दोनों गढ़े से बाहर चले जायेंगे।                  सोनू यह बात सुन कर गुस्सा आया और सोनू ने जोर से छलांग लगाई और गढ़े के बाहर चला गया यह देख मोनू को आश्चर्य हूआ, पर सोनू गढ़े से बाहर निकलते ही...... मोनू का धन्यवाद किया और मोनू को भी गढ़े से बाह...