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दो मेंढक

 

                एक गांव में पास तालाब हुआ करता था। तालाब में दो मेंढक जिसमे एक का नाम सोनू और दूसरे का नाम मोनू था। दोनों मेंढक बहोत अच्छे दोस्त थे। 



               तालाब हमेशा पानी से हरा-भरा रहता था। लेकिन बीते कुछ बर्षो में बारिश ठीक से नही हुआ है। जिससे तालाब का पानी धीरे धीरे सुख ने लगा लगा। 

                तालाब सुख गया पर एक गढ़े में पानी भरा हुआ था। सोनू वह गढ़े से बाहर आने के लिए,  बार बार छलांग लगा रहा था पर बार-बार सोनू फिसल कर गढ़े में गिर जाता था। यह देख......... मोनू ने कहा.......क्यों मेहनत कर रहे हो? कुछ दिन में बारिश होने वाली है। बारिश होते ही हम दोनों गढ़े से बाहर चले जायेंगे। 

                सोनू यह बात सुन कर गुस्सा आया और सोनू ने जोर से छलांग लगाई और गढ़े के बाहर चला गया यह देख मोनू को आश्चर्य हूआ, पर सोनू गढ़े से बाहर निकलते ही...... मोनू का धन्यवाद किया और मोनू को भी गढ़े से बाहर आने के लिए कहने लगा, पर  मोनू तो बारिश के भरोसे बैठा हुआ था।

               कुछ दिनों के बाद गढ़े का भी पानी सूख गया। पानी सूख जाने से मोनू  कमजोर हो गया। पर अब क्या कर सकते है। मोनू ने गढ़े से बाहर निकलने के लिए छलांग लगाने लगा पर कमजोरी से मोनू छलांग नही लगा पा रहा था। 

              मोनू को सोनू की बाते याद आने लगी पर अब मोनू के पास पछतावा से सिवा कुछ भी बचा नही था। बारिश न होने से मोनू की गढ़े में मौत हो गई।

        सिख : मेहनत कर ने वालो की कभी हार नही होती। यह कहावत नही एक सत्य वचन है। जो दो मेंढक में देखने को मिलती है। सोनू मुसीबत में मेहनत कर के गढ़े से बाहर आ जाता है और दूसरी तरफ मोनू बारिश के भरोसे बैठा रहता है। जो भरोसे से बैठा रहा वह अपने प्राण(जिंदगी) गवाता है। 

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