स्वामी विवेकानंद के बचपन की यह कहानी है, जब स्वामी जी मंदिर से वापसी के समय अपने घर के लिए प्रसाद लिया। रास्ते मे स्वामी जी को देख कुछ बंदर स्वामी जी के पास आने लगे जिसे देख स्वामी जी डर के मारे वापस मन्दिर की तरफ भागने लगे....
फिर स्वामी जी अपने घर जाने के लिए रास्ते पर जाते कुछ बंदर फिर से स्वामी जी के आगे आकर डराने लगे, जिससे स्वामी जी फिर से डर कर मंदिर की तरफ आ जाते,
यह पास में बैठ कर एक साधु देख रहा था।साधु ने स्वामी जी को अपने पास बुलाया और कहा तुम जितना डरोगे सब तुम्हे डराएंगे, तुम खड़ेरहो, देखो, सामने वाला क्या कर सकता है।
साधु की बात सुन ने के बाद स्वामी जी रास्ते पर जाने लगे बंदर भी आगे की तरफ आने लगे पर स्वामी जी डरे नही जिससे बंदर वापस भाग गए।
सिख : मुसीबतों को देख कभी वापस भागना नही चाहिए पर निडर होकर उसका सामना करना चाहिए।

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