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बहेरा बना विजेता

           संतरामपुर गांव में हर साल दिवाली के त्यौहार ओर गांव के लोग मिल कर कुछ कुछ नया करने का सोचते है। जो भी विजेता होता उसे नए कपड़े, ईनाम में रुपये, फटाके, जो भी गांव के लोगो से बन पाये वह ईनाम के रूप में देते है।



            दिवाली के त्यौहार पर भी कुछ नया ही होने वाला था। इस बार 20 से 25 फुट एक खम्बे पर चढ़ना था। खम्बे को गांव के तालाब के बीच मे गढ़ा कर के गाढ़ा गया। गांव के सारे लड़को ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया । 

              खम्बे पर चढ़ना मुश्किल ही नही बहोत कठिन था। क्योंकि खम्बे पर कीचड़, पानी के बीच मे था। सबसे पहले खम्बे तक जाने के लिए उसे कीचड़ में जाकर ही खम्बे के पास जाना पड़ता था। 

           यह खेल देखने के लिए गांव और आसपास के पूरे गांव के लोग आते थे। और खुसी खुसी खेल को देखते है। आज पर कुछ नया देख ने को मिलेगा। घिरे घिरे गांव के सब लड़के खेल में भाग लेने लगे। सारे लड़को ने भाग लिया और गिरते, पड़ते खम्बे पर चढ़ते, गिरते थे। फिसलन के कारण कोई भी लड़का  खम्बे पर चढ़ नही पा रहा था। यह देख गांव के सारे लोग चीला रहे थे.......कोई भी नही चढ़ पायेगा,........कोई भी नही चढ़ पायेगा।

             बहोत मुश्किल से कुछ लोग खम्बे के आधे तक पहोच पाते और गिर जाते। बहोत लोगो ने महेनत की पर नही चढ़ पाये, कितने नो काफी कोशिश के बाद भी खम्बे पर नही चढ़ पाये ओर वह भी गांव के लोगो के साथ मिलकर चिलाने लगे कि नही खम्बे पर चढ़ पाओगे, नही चढ़ पाओगे।

            काफी समय बीत गया धीरे धीरे लड़को की भीड़ कम होने लगी। इन मे एक लड़का जो मौका मिलता फिर कोशिश करता, गिर जाता फिर कोशिश करता, सारे लोग उसे देख ओर चिलाने लगते की गिर जाओगे नही चढ़ पाओगे.... नही चढ़ पाओगे।

               अंतिम समय मे वह लड़का आखिर खम्बे पर चढ़ गया और ईनाम जीत लिया। पहलीबार बहोत मुश्किल से विजेता बना। 

                 ईनाम जीत ने के बाद सभी लड़के जो उसे नही जानते थे। उसे पूछ ने लगे कि आप ने यह जीत कैसे प्राप्त की। पर लड़का कुछ भी  नहीं बोला, बहोत पूछ ने के बाद पीछे से किसी ने बोला कि यह लड़का बहेरा हैसुन नही सकता।                                                                                    पर सबको जानने में उत्सुकता थी कि यह कैसे खम्बे पर चढ़ गया जिसमें कोई भी नही चढ़ पाया। थोड़ी देर बाद बहरे लड़के ने इसारो से  बताया कि मैं जब भी गांव के तरफ देख ता लोगो को चिल्लाते देख ऐसा लगता मानो गांव के लोग मुजे कह रहे कि तुम कर सकते हो...... खम्बे पर चढ़ सकते हो..... यह सब मुजे सुनाई देता था।

             सिख : यह कहानी छोटी है पर हमे कभी हार नही माननी चाहिए। कुछ लोग कोई भी काम करने से पहले हार मान कर बैठ जाते है। कुछ लोग मेहनत करते है पर निष्फलता मिलते ही वह काम छोड़ देते है। फिर कभी वेह काम करने की कोशिश नही करते है। पर यह कहानी कोशिश कर ने वालो की कभी हार नही होती। जिसके कुछ सफलता की कहानी के सुपरस्टार है।

   ★ एडिसन जिस ने बल्ब के प्रयोग की कोशिश 1000 से ज्यादा बार की ......अगर आज एडिसन हार मानकर बैठ जाते तो आप और में आज अंधरे में या कही दिए के पास बैठे होते।

    ★ महेतो : छत्तीसगढ़ में जिसने एक पूरा पहाड़ एक हतोड़ि, ओर छीना से पूरा पहाड़ को खोद कर रास्ता बना दिया , जिस पर फ़िल्म बी बन चुकी है।  अगर यह भी दूसरे के भरोसे बैठे रहते तो आज भी वह पहाड़ होता। 

              

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