नमस्ते दोस्ती आज में आप से सफलता की बात करूंगा जिसे पाने के लिए हर व्यक्ति, हर पल परेशान रहता है। जिहा में आज सफलता की सीढी चढ़ने वाले ब्लॉगर की बात करूंगा।
ब्लॉग लिखना मेने शरू किया, लिखते लिखते 60 से ज्यादा पोस्ट मेने लिख भी दिए और अच्छा रिस्पॉश भी मिल रहा था। यह देख ते हुए मेने एडसन में अपना एकाउंट भी बना लिया। थोड़ा समय जाने के बाद मेरा एडसन अकाउंट के लिए अप्लाई किया हुआ एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिया गया कि अभी आपको हम एडसन में ad दिखाने का मौका नही दे सकते। फिर से अप्लाय करना। तुमारा ब्लॉग अभी एडसन के लिए तैयार नही हुआ है।
यह निष्फलता ने मुजे फिर कभी भी ब्लॉग नही लिखूंगा, ना ही पढूंगा मेने बंध कर दिया। 24 घन्टे बाद मुजे बचपन की कहानी याद आई जो बचपन मे स्कूल के समय मे आती थी।
"धीरज के फल मीठे" "सब्र का फ़ल मीठा"
क्योंकि ब्लॉग भी एक आम के पेड़ की तरह है। अगर आप ने आम का पौधा लगाया है तो आम का के पौधे को पेड़ बनने में कम से कम ५ वर्ष की आयु तो लगनी ही है। आम का पौधा बड़ा होगा, उसकी शाखा ये मजबूत होगी, उस पर फूल आएंगे और बाद में फल लगेंगे ओर फल पकने के बाद ही आप को आम के फ़ल मीठे लग ने लगेंगे। इस पूरी घटना में कम से कम ५ वर्ष का समय है।
आप सब सोच रहे होंगे कि मैने ब्लॉग को आम के पेड़ के जैसा क्यों कहा ?
ब्लॉग एक पौधा है, जैसे जैसे आप ब्लॉग में लिखना सरू करेंगे वैसे वैसे आप का ब्लॉग भी आम के पौधे की तरह बड़ा होता जाएगा। जैसे आम के पेड़ पर फूल आते है वैसे ही आप के ब्लॉग पर like(लाइक) आने लगेंगे। बस फिर क्या आप गूगल में एडसन में अपना अकाउंट बनाये और विज्ञापन दिखा के "मीठे आम" की तरह रुपये कमा सकते है। यह पूरे काम मे आप को अपने आप पर सयम, धीरज, इन्तजार ,सब्र तो रखना ही पड़ेगा।
आज आपने ब्लॉग लिखा और वह कल के कल आपको रुपये कमाकर दे दे यह बहोत मुश्किल है।
इस लिए मेने कहा है दोस्तो "धीरज के ब्लॉग बहोत रुपये देता है"!

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