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मनबुद्धि बना वैज्ञानिक

     

         एक गांव में एक लड़का रहता था। जो दिमाग से मनबुद्धि था। वह लड़के को कितना भी आप समझा दो, लिखवा दो पर उसे कुछ भी याद नही रहता था। 



         लड़के को सरारत करना अच्छा लगता था। वह पढ़ाई में मन बुद्धि होने से वह सरारत जो दूसरों की जान भी ले सकता है। पढ़ाई में चिड़या हवा में क्या भोजन कर के उड़ती है। फिर क्या उस ने अपने आसपास के सारे कीड़े, मकोड़े, पीस कर अपने ही दोस्त को पिला दिया क्योंकि वह भी हवा में उड़ सके । वह हवा में तो नही बल्कि बीमार हो गया जब सबको पता चला कि मनबुद्धि ने सारे कीड़े पिला दिए। 

              यह बात उसके स्कूल तक बात गई और मनबुद्धि  को एक लेटर बना के दे दिया जो अपनी माँ को देने के लिए कहा गया। मनबुद्धि लेटर अपनी माँ को दे दिया उसकी माँ ने लेटर पढ़ा और बोला......मनबुद्धि तू बहोत होशियार है, तेरे लायक कोई भी स्कूल नही बना! और मनबुद्धि अपने गले से लगा लिया। 

              धीरे धीरे वह अपने ही आप मे एक खोज करने लगा। और एक दिन सारा विश्व आज अंधेरा होते ही रोशनी के लिए बल्ब जलता है। वह ओर कोई नही एक मनबुद्धि ही है जिसने अपने आप को कभी भी दूसरों जैसा नही समजा और एक दिन वह अपने पुराने घर मे स्कूल के लेटर को पढ़ते है और मनबुद्धि के आँखोंसे आंसू आ जाते है......                                                                                         मनबुद्धि की माँ ने जो कहा था वह सब गलत था। लेटर में लिखा था कि आप का बच्चा मनबुद्धि है, उसे हम हमारे स्कूल में पढ़ा नही सकते। और वह ओर कोई नही बल्ब के जनक थामस अल्वा एडिसन है  ।

         जो  मनबुद्धि जोते हुए भी अपनी माँ की सोच ने एक महान वैज्ञानिक बना दिया।

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